
ओम जी मुस्कराते हुए बोले, "अरे नमिता, तुम्हें पता है मैं कितना अकेला महसूस कर रहा हूँ। इश्की के जाने से घर में एक अजीब सा खालीपन महसूस हो रहा है। तुम्हारे साथ बिताए गए पल मुझे उसकी याद से बचाते हैं।"
नमिता जी का चेहरा थोड़ा नरम पड़ता है, लेकिन वह फिर भी ओम जी को टोकती हैं, "ओम, तुम्हें अपनी बेटी की याद आनी चाहिए, न कि मुझे अपनी बाहों में भरने की सोचो।"

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